सोंठ के लड्डू बनाने के लिए हमें चाहिए 1/4kg सोंठ 1kg सिंघाड़ा (वैकल्पिक) 1kg गेहूं का आटा 1/4kg बादाम 1/4kg काजू 2.5kg चीनी 2kg घी 1/4kgगोंद सोंठ को कूटकर पीस लें छान कर रख लें।
सिंघाड़े को कूटकर पीस लें सूखे मेंवो को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। एक कड़ाही में 1 किलो घी गर्म करें , इसमें सिंघाड़े के आटे को डालकर अच्छी तरह से चलाते हुए भुने, सिंघाड़े को बिल्कुल सुनहरा नहीं करना है उसे थोड़ा-थोड़ा रंग बदलने तक ही भुनना ह। आटा बराबर पकने के बाद कड़ाही आंच से उतार दे और आटे को किसी बड़े बर्तन में निकाल ले फिर वही कढ़ाई आंच पर रखें और किलो से थोड़ा कम घी डालकर गर्म करें। गर्म होने के बाद उस में गेहूं का आटा डालें अच्छे से कलछी घुमाते हुए आटे को भुन ले। आटे को सुनहरा होने तक भूनना है । आटा सुनहरा होने के बाद कड़ाही को आंच से उतार लें और इस आटे को सिंघाड़े के आटे के साथ निकाल ले।
गोंद को पीसकर पहले से रख लें और इस गरम-गरम आटे के अंदर डालकर पूरे आटे के साथ मिक्स कर लें फिर पिसी हुई सोंठ को भी इस आटे में मिला ले कुटे हुए काजू बदाम देश के साथ मिक्स करके पूरे मिक्सचर को अच्छी तरह से मिलाएं। चासनी के लिए सवा किलो पानी कड़ाही में डालें और इसके अंदर पूरी चीनी डाल दे अच्छे से कलछी घुमाते रहे जब तक पूरी चीनी गल नहीं जाती चीनी गल जाने के बाद उसके अंदर थोड़ा सा दूध डालें उससे चीनी से निकला हुआ गंदगी या कचरा चासनी के ऊपर आ जाएगा उससे किसी छलनी की मदद से निकाल लें फिर थोड़ा सा बचा हुआ घी चासनी के अंदर डाल दे इससे चासनी बहुत अच्छी बनती है और लड्डू बनने के बाद वह बहुत ज्यादा सख्त नहीं होते। चासनी में उबाल के साथ जब सफेद झाग आने लगे तो चम्मच की मदद से चासनी बनी है कि नहीं यह देखें एक तार की चाशनी बनानी है उसके लिए चम्मच से चासनी को ऊपर लेकर वापस कड़ाही में धीरे-धीरे गीराए और अंत में जो थोड़ी सी चासनी बचेगी उसको गिरते हुए ध्यान से देखें कि एकदम सीधी और लंबी तार बन रही है कि नहीं ऐसे अगर नहीं समझ आ रहा है तो उंगली और अंगूठे के बीच चासनी की एक बूंद को लेकर देखें अंगुली और अंगूठे के बीच में तार बन रहा है तो चासनी को आंच से नीचे उतारे और उसको थोड़ा ठंडा होने दें फिर उसके अंदर पूरे आटे मिक्स किए हुए हैं वह डाल दें अच्छी तरह से चासनी में आटे को मिलाएं और जब थोड़ा गाढ़ा होने लगे या लड्डू बनाने लायक हो जाए दो से फटाफट लड्डू बनालो।
हाथ ना जले इसके लिए हाथों में पॉलिथीन पहन ले या कोई और कवर और फिर अगर आप लड्डू ना बनाना चाहे तो कोई बड़ी थालियां ले ले और उन्हें घी से चुपड़ दे उसके अंदर यह मसाला फैलाए अच्छे से पटक के बराबर बराबर फैलाएं जब थोड़ा सा जमने लगे चाकू से काट कर देखें की अगर वह मसाला वापस नहीं चिपक रहा है और जहां से काटा गया है वहां कटा ही रह गया तो उन्हें मिठाई की चक्कियो की तरह काट दे एक-दो घंटे बाद जब पूरी तरह से जल जाए तो चकिया निकाल ले इन सर्दियों में यह लड्डू महिलाओं और बूढ़ों के लिए बहुत अच्छे है। यह लड्डू उन महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है जिन्होंने अभी-अभी बच्चे को जन्म दिया है बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को सोंठ के लड्डू जरूर खाने चाहिए। आपको यह रेसिपी कैसी लगी कमेंट करें
तिल के लड्डू बनाने के लिए हमें चाहिए 1 किलो तिल धो कर सुखा दे और सूखने के बाद उन्हें एक कड़ाही में भुन ले। तिल को अच्छे से चटकने दें,फिर तिल को चबाकर देखें अगर आसानी से चबाए जा रहे हैं। चबाने में एकदम नरम हो उसमें नमी बिल्कुल ना हो बिलकुल popcorn जैसा।
फिर कड़ाही से तिल निकाल लें। और कड़ाही को फिर आंच के ऊपर रखकर उसमें 200 ग्राम पानी डालें और लगभग 400 ग्राम गुड़ डाल दे। और अच्छे से पका कर चासनी बनाएं चासनी बनी है कि नहीं जानने के लिए चासनी को एक चम्मच में लेकर अच्छे से चासनी को नीचे गिराए और उससे अच्छी तरह से देखते रहे चम्मच एकदम खाली होने के बाद अंत में जो थोड़ी सी चासनी बचती है वह चासनी गिरते समय बिल्कुल एक छोटे बर्फ के टुकड़े की तरह चमक से एक साथ नीचे गिरेगी तब तब चासनी बिल्कुल तैयार होगी और फिर कड़ाही आज से नीचे रख दे थोड़ा सा ठंडा होने के बाद तिल चासनी के अंदर डाल दे और अच्छी तरह से मिला दे चासनी और तिल बिल्कुल अच्छे तरीके से मिक्स कर दे।
इस मिक्सचर को ठंडा होने दें क्योंकि गर्म तिल एक साथ बंधते नहीं है तो उसके लड्डू नहीं बना सकते तिल और चासनी बिल्कुल ठंडी होने के बाद ही लड्डू बनते हैं । तो अचानक लड्डू ना बनने के कारण चिंतित होने की जरूरत नहीं है तिल गर्म होता है तो तेल छोड़ता है। जिसके कारण लड्डू नहीं बन पाते ठंडा होने के बाद उससे लड्डू बनाना आसान होता है। तिल के लड्डू बांधते समय अगर तिल हाथों पर चिपक रहे हैं तो हाथों पर पानी लगाएं।तेल या घी न लगाए।
स्पेशल सलाह.. अगर गुडः कि जगह शक्कर की चासनी बनाना चाहते हैं तो आधा गुडः और आधी शक्कर डाले अकेली शक्कर से तिल के लड्डू बनते नहीं, क्योंकि मैने पहले ही बताया गर्म तिल के लड्डू बनते नहीं बनते ही सूख जाती हैं। अगर पहली बार शक्कर से तिल के लड्डू बना रहे हैं तो आधा गुडः जरूर डाले। अगर मीठा कम खाते हैं तो 300 से ढाई सौ ग्राम तक डाल सकते हैं उससे कम डाला तो लड्डू एकदम ठीक के हो जाएंगे। सर्दियों में जो आमतौर पर जो लड्डू बनाए जाते है। जैसे सोंठ के लड्डू हल्दी के लड्डू मेथी के लड्डू गोंद के लड्डू आदि इन सब की रेसिपी लगातार में एक सीरीज में अपलोड करने वाली हूं तो सारी रेसिपीज जानने के लिए फैमिली गुरु को फॉलो करें
आजकल की लाइफस्टाइल मैं इलेक्ट्रिक चीजों का ज्यादा महत्व बढ़ गया है किसी भी घर में इलेक्ट्रिक चीजें यूज़ ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। Fridge ,mixi ,electronic Chakki, washing machine जैसी मशीनें हर घर में उपलब्ध है ।
इलेक्ट्रिक चीजें यूज़ करने से पहले कुछ बातें हमेशा याद रखें सबसे पहले कोई भी इलेक्ट्रॉनिक मशीन यूज करते समय चप्पल हमेशा पहन के रखें । क्योंकि आपकी मशीन कितनी भी नई हो या महंगी और सुरक्षित हो चलती तो वह बिजली से ही है तो अपना ख्याल रखें और पैरों में रबर के जूते हमेशा पहन के रखें। खास तौर पर चक्की चलाते समय और मिक्सी चलाते समय तो अवश्य ही पहन के रखें। फ्रिज के बर्फ निकालते समय और koi bhi electric switch बंद करते समय चप्पल पहनना न भुले। electronic चक्की का इस्तेमाल करते समय क्या ध्यान रखें। चक्की का उपयोग करते समय याद रखें की चक्की ऑन करने से पहले उसका नाल (आटे की पिसाई मोटी या पतली करने के लिए इस्तेमाल होने वाला हथा) को ढीला रखें ताकि जब चक्की ऑन हो तो उसके बेल्ट को जोर ना लगे अगर नाल ढीला न हुआ तो बैल्ट टूट जाएगा। चक्की ऑन करते ही सबसे पहले नाल को टाइट करें और फिर दाने अंदर जाने दे चक्की को इतना टाइट भी ना करें कि उसकी जो अंदर के पत्थर के चक्के हैं वह घिस जाए अगर पत्थर के चक्के घिस गए तो चक्की महीन आटा नहीं निकालेगी। चक्की को कभी भी खाली ना घूमने दे जैसे ही चक्की में दाने खत्म हो जाए नाल फिर से ढीला करें पूरा आटा बाहर निकलने दे और स्विच ऑफ कर दे। वाशिंग मशीन इस्तेमाल करते समय खास टिप्स याद रखें। वाशिंग मशीन पर उसको इस्तेमाल करने के पूरे टेक्स्ट लिखे होते हैं उन टिप्स को फॉलो करके ही मशीन का यूज करें तुम जितना भार मशीन में डालने की इजाजत दी गई है उतने ही कपड़े और पानी मसीन में डालें ।
कपड़े कितने मिनट तक धोने हैं पहले से यह सोच लें और टाइमर को इस तरह ही सेट करें टाइमर के बटन को कभी भी हाथ से बंद ना करें इससे मशीन जल्दी खराब हो जाती है इसलिए टाइमर को अपने आप ही बंद होने दें.। मिक्सी का उपयोग मिक्सी का इस्तेमाल करते समय सबसे पहले चप्पल पहन ले। चाहे आप जूसर का इस्तेमाल कर रहे हो या मिक्सर का या फिर ग्राइंडर का मिक्सी के किसी भी जारको मिक्सी के ऊपर लगाने के बाद उसे हाथ से जोर देकर के रखें हाथ का भार बिल्कुल सेंटर में होना चाहिए थोड़ा भी इधर उधर बाहर होने से जार के नीचे की चाकिया टूट जाएगी और अगर हाथ ऊपर ना रखा तो भी मिक्सी चलते ही जार के हिलने से चाकिया टूट सकती हैं।
जूसर का यूज़ करते समय मिक्सी हमेशा एक नंबर पर ही चलाएं। मिक्सी का कोई भी जार यूज करने से पहले देख ले की उसकी पत्तियां अच्छे से घूम रही है या नहीं उसके लिए जार के नीचे जो चाकिया लगी होती है उसे हाथ से घूम आए अगर वह आसानी से ना घूम रही हो या जाम हो गई हो तो पहले उसे हाथ से घुमाकर ठीक कर ले उसके बाद ही जार का इस्तेमाल करें। फ्रिज का रखरखाव फ्रिज का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सबसे पहले याद रखें की फ्रिज का दरवाजा कभी भी ज्यादा देर तक खुला ना रहने दे फ्रिज में से कोई भी चीज लेने या रखने से पहले सब दिमाग में याद कर ले और दरवाजा खोलते ही फटाफट निकाल ले या रख ले ताकि फ्रिज का दरवाजा ज्यादा देर खुला ना रहे फ्रिज का दरवाजा ज्यादा देर खुला रहने से फ्रिज की गैस खत्म हो जाती है और फिर जल्दी खराब हो जाता है। फ्रीजर में जमी बर्फ को हटाने के लिए कभी भी चाकू छुरी का इस्तेमाल ना करें बर्फ हटाने के लिए फ्रीज में जो सिस्टम है उसी का यूज़ करें फ्रिजर में से कोई भी चीज अगर निकाल रहे हैं या रख रहे हैं तो पैरों में चप्पल पहनना ना भूलें वैसे तो फ्रीज में जल्दी करंट नहीं आता फिर भी अपना ख्याल खुद रखें। फ्रिज को अंदर से साफ करते समय पहले स्विच बोर्ड से फ्रिज के पिन निकालने फिर साफ कपड़े से फ्रिज को अंदर से क्लीन कर ले फ्रीज में गंदी बुलाए इसके लिए उसके अंदर एक कटोरी में नमक रख सकते हैं। फ्रिज के अंदर कोई भी चीज हमेशा ढक कर ही रखें। ऐसी कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर बने स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक यूजर
With regards to the Moon, everybody needs very similar things. Not in the feeling of having shared objectives, but rather as in all players focus on similar key destinations – state organizations and the private area the same. That is on the grounds that, regardless of whether you need to do science or bring in cash, you will require things, for example, water and light.
Numerous nations and privately owned businesses have aspiring designs to investigate or mine the Moon. This won’t be at some far off point as expected however soon – even in this decade. As we set out in our ongoing paper, distributed in the Transactions of the Royal Society, this will start strain on the ground except if we discover approaches to deal with the circumstance unavoidably.
Up until now, a large part of the discussion around investigating and mining the Moon has zeroed in on pressures in space between state organizations and the private area. Be that as it may, through our eyes, the squeezing challenge emerges from restricted key assets.
Strategic Sites
Significant locales for science are likewise significant for foundation development by state offices or business clients. Such destinations incorporate “pinnacles of unceasing light” (where there is practically consistent daylight and henceforth admittance to control), and ceaselessly concealed holes at the polar areas, where there is water ice. Each is uncommon, and the blend of the two – ice on the pit floor and a tight pinnacle of endless light on the pit edge – is a valued objective for various players. In any case, they happen just in polar locales, instead of at the central destinations focused by the Apollo program during the 1960s and 1970s.
The ongoing effective arriving of Chang’e 5 by China focused on a generally smooth landing site on the lunar nearside, however it is important for a bigger, staged program because of bring China’s space organization down to the lunar south pole by 2024.
India attempted a more straightforward polar course, with its bombed Chandrayaan-2 lander slamming in a similar area in 2019. The Russian Roscosmos, working together with the European Space Agency, is additionally focusing on the south polar locale for arrivals late in 2021 and, in 2023, at Boguslavsky hole, as a test mission.
Next, Roscosmos will focus on the Aitken Basin in a similar locale in 2022 on the to prospect for water in for all time shadowed zones. Various privately owned businesses additionally have yearning plans for digging the Moon for assets.
Vital assets that are not in the polar areas will in general be focused as opposed to uniformly dispersed. Thorium and uranium, which could be utilized for radioactive fuel, are discovered together in 34 districts that are zones of under 80km wide. Iron coming about because of space rock effects can be found inside more extensive regions, going from 30km-300km across, yet there are just around 20 such territories.
And afterward there is the banner kid of lunar assets, mined in many sci-fi films: Helium-3, for atomic combination. Cultivated by the Sun in the fine squashed stone of the lunar surface, it is available in wide regions across the Moon, yet the most noteworthy focuses are found in just around eight districts, all moderately little (under 50km across).
These materials will be of interest both to those attempting to set up framework on the Moon and are later focusing on Mars just as business misuse (mining), or science – for instance making adjustable clusters on the lunar far side, away from the developing commotion of human correspondences.
How at that point do we manage the issue? The Outer Space Treaty (1967) holds that “the investigation and utilization of space will be completed for the advantage and in light of a legitimate concern for all nations and will be the region of all humankind.” States don’t will guarantee portions of the Moon as property, however they can in any case utilize them. Where this leaves debates and extraction by privately owned businesses is indistinct.
Proposed replacements to the treatment, for example, the Moon Agreement (1979), are viewed as excessively prohibitive, requiring a proper system of laws and an aspiring global administrative system. The understanding has neglected to pick up help among vital participants, including the US, Russia and China. Later advances, for example, the Artemis Accords – a bunch of rules encompassing the Artemis Program for manned investigation of the Moon – are seen as intensely attached to the US program.
In the worst case, this lack of framework could lead to heightened tensions on Earth. But it could also create unnecessary duplication of infrastructure, with everyone building their own stuff. That would drive up costs for individual organisations, which they would then have reasons to try to recoup in ways that could compromise opportunities for science and the legacy we leave for future generations.
Way Forward
Our best starting reaction might be humble, following ignored locales on Earth. Little earthbound asset pools, for example, lakes circumscribed by a few towns, or fish stocks are frequently overseen through methodologies grown locally by the vital participants included.
These propose that an initial move toward lunar-asset administration will make arrangement among clients. This should zero in on the idea of the assets in question, how their advantages should be disseminated, and, significantly, the most pessimistic scenario situations they look to dodge. For instance, entertainers will probably have to choose whether the pinnacles of interminable light should be overseen as a fix of high-esteem land or as a volume of energy yield to be shared. It might likewise merit settling dependent upon the situation.
Another test will encourage consistence with the administration courses of action that are concocted. Keeping that in mind, lunar clients would be very much encouraged to construct shared establishments, for example, landing and supply offices, to work as carrots that can be retained from acting mischievously entertainers. Such fractional arrangements will be hard to add after a nation or organization has made irreversible interests in mission plans. Obviously, an opportunity to devise these methodologies is currently.
Washington: Using information gathered at NASA’s Infrared Telescope Facility (IRTF) and circle examination from the Center for Near-Earth Object Studies (CNEOS) at NASA’s Jet Propulsion Laboratory, researchers have affirmed that Near-Earth Object (NEO) 2020 SO is, truth be told, a 1960’s-Era Centaur rocket promoter.
The item, found in September by space experts looking for close Earth space rocks from the NASA-subsidized Pan-STARRS1 study telescope on Maui, earned revenue in the planetary science network because of its size and bizarre circle and was concentrated by observatories around the globe, as per an official delivery.
Further examination of 2020 SO’s circle uncovered the article had approached Earth a couple of times throughout the long term, with one methodology in 1966 bringing it sufficiently close to propose it might have started from Earth.
Contrasting this information and the historical backdrop of past NASA missions, Paul Chodas, CNEOS chief, closed 2020 SO could be the Centaur upper stage rocket sponsor from NASA’s disastrous 1966 Surveyor 2 mission to the Moon.
Outfitted with this information, a group drove by Vishnu Reddy, a partner educator and planetary researcher at the Lunar and Planetary Laboratory at the University of Arizona, performed subsequent spectroscopy perceptions of 2020 SO utilizing NASA’s IRTF on Maunakea, Hawai’i.
“Because of outrageous faintness of this item following CNEOS forecast it was a provoking item to portray” said Reddy. “We got shading perceptions with the Large Binocular Telescope, or LBT, that recommended 2020 SO was not a space rock.”
Through a progression of subsequent perceptions, Reddy and his group dissected the 2020 SO’s creation utilizing NASA’s IRTF and thought about the range information from the 2020 SO with that of 301 tempered steel, the material Centaur rocket supporters were made of in the 1960’s.
While not quickly an ideal match, Reddy and his group persevered, understanding the disparity in range information could be a consequence of dissecting new steel in a lab against steel that would have been presented to the unforgiving states of room climate for a very long time. This drove Reddy and his group to do some extra examination.
“We realized that in the event that we needed to make a valid comparison, we’d need to attempt to get otherworldly information from another Centaur rocket supporter that had been in Earth circle for a long time to then check whether it better coordinated 2020 SO’s range,” said Reddy.
“On account of the extraordinary speed at which Earth-circling Centaur supporters traverse the sky, we realized it would be incredibly hard to bolt on with the IRTF sufficiently long to get a strong and dependable informational index.”
Notwithstanding, on the morning of Dec 1, Reddy and his group pulled off what they thought would be unthinkable. They noticed another Centaur D rocket supporter from 1971 dispatch of a correspondence satellite that was in Geostationary Transfer Orbit, sufficiently long to get a decent range.
With this new information, Reddy and his group had the option to think about it against 2020 SO and discovered the spectra to be predictable with each another, along these lines completely finishing up 2020 SO to likewise be a Centaur rocket sponsor.
“This end was the aftereffect of an enormous collaboration,” said Reddy. “We were at last ready to unravel this secret on account of the incredible work of Pan-STARRS, Paul Chodas and the group at CNEOS, LBT, IRTF, and the perceptions around the globe.”
2020 SO made its nearest way to deal with Earth on Dec 1, 2020, and will stay inside Earth’s circle of gravitational predominance – a locale in space called the “Slope circle” that broadens about 930,000 miles (1.5 million kilometers) from our planet – until it escapes once again into another circle around the Sun in March 2021.
As NASA-subsidized telescopes review the skies for space rocks that could represent an effect danger to Earth, the capacity to recognize normal and fake items is significant as countries proceed to investigate and more fake articles wind up in circle about the Sun. Cosmologists will keep on noticing this specific relic from the early Space Age until it’s gone.
Microsoft teams, the very talked-about internet conferencing service, goes to stop working on internet explorer eleven from nowadays. So, if you have been using Microsoft teams on internet explorer thus far, to continue to use the service you may have to be compelled to move to Microsoft Edge to be able to use it on the browser.
Microsoft had proclaimed this earlier this year and this can bea part of the company’s push to inducenetinternet users to move on to using Edge.
Microsoft teams isn’t the sole thing that the internet explorer eleven is losing currently, the “veteran” browser from the house of Microsoft also will lose access to Microsoft 365 services shortly. By August seventeen next year, Microsoft 365 services cannot work on internet explorer. The legacy version of Microsoft Edge also will reach end of support on March nine next year.
These progressions were declared by Microsoft in a blog entry recently where the organization said Internet Explorer 11 isn’t disappearing, however the measure of mileage you can get from your program will decrease essentially. Likewise with the tradition of Microsoft Edge arriving at its finish of help, plainly Microsoft will focus on altogether on the chromium-based form of Microsoft Edge all things considered.
“We’re announcing that Microsoft 365 apps and services will no longer support Internet Explorer 11 (IE 11) by this time next year. Beginning November 30 2020, the Microsoft Teams web app will no longer support IE 11.Beginning August 17 2021, the remaining Microsoft 365 apps and services will no longer support IE 11,” Microsoft said.
Here is the time line for announced events.
“This implies that after the above dates, clients will have a corrupted encounter or will be not able to interface with Microsoft 365 applications and administrations on IE 11. For debased encounters, new Microsoft 365 highlights won’t be accessible or certain highlights may stop to work while getting to the application or administration by means of IE 11. While we realize this change will be hard for certain clients, we accept that clients will capitalize on Microsoft 365 when utilizing the new Microsoft Edge. We are focused on helping make this change as smooth as could be expected under the circumstances,” the organization clarified.”
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शादियां का सीजन शुरू हो चुका हे कुछ शादियां हो चुकी है । और कुछ अब होने वाली है ऐसे में कुछ नहीं दुल्हनों के मन में यह सवाल आता ही होगा की ससुराल में क्या होगा लोग उनके साथ कैसे डील करेंगे और सबसे इंपॉर्टेंट कि वह खुद सबके साथ कैसे व्यवहार करें कि सब लोग उनकी तारीफ करें और वह सबके साथ अच्छे से रह पाए वैसे तो किसी के साथ घूमने मिलने के लिए एक दूसरे का मन हो ना जरुरी लेकिन ससुराल में कुछ बातों का ध्यान रखकर आप या नई दुल्हन अपने आप को जिम्मेदार साबित कर सकती हैं
सुबह जल्दी उठे। ससुराल जाने के बाद सुबह जल्दी उठे यह बहुत जरूरी है मैं अपना अनुभव बता सकती हूं क्योंकि मैं ससुराल में जल्दी नहीं उठ पाई थी जिसके कारण मुझे काफी समस्याएं उठानी पड़ी क्योंकि शादी में बहुत मेहमान खासतौर पर औरते आई हुई होती है तो आप नई गोशीप का कारण भी बन जाते हो इसलिए शादी के बाद ससुराल में हमेशा जल्दी ही उठें यह बहुत जरूरी है।
जैसा कहा जाए वैसा करे शादी के बाद ससुराल में कुछ रिवाज निभाए जाते हैं जो हर जगह अलग-अलग होते हैं लेकिन रिवाज हर जगह निभाए जाते हैं लेकिन हर जगह कुछ अंतर अवश्य होता हैं इसलिए आपको जो पहले पता ही उसने से आप कुछ ना करें जो आपको उस समय कहां जा रहा है जो करने के लिए जिस तरह से करनी के लिए उसी तरह से करते जाएं क्योंकि यह सही और गलत साबित करने का समय नहीं हैं जैसा जहां का रिवाज वैसा ही होने दो। जिसमें बेस्ट है वही करें ससुराल में बहुत सारी रश्मे कराई जाती है जैसे कही कही दुल्हन को गाने या नाचने के लिए भी कहा जाता है वहां पर आप सीधा ना न कहें और अगर आपको आता तो वही गाना गाए या डांस करें जो आपने पहले कई बार किया है और जिसका आपको अनुभव हो कुछ नया यहां पर ट्राई ना करें यही बात खाना बनाते वक्त भी याद रखें जो भी आपको आपको बहुत ही अच्छा बनाना आता है वही बनाएं वैसे तो ससुराल में पहली रसोई बनाते वक्त क्या बनाना है यह घर की बड़े बता ही देते है तो वही बनाना पड़ता है लेकिन अगर आपको खुद से कुछ बनाना ही तो जो आपको सबसे अच्छा बनाना आता है वही बनाकर खिलाएं नई रसोई में कुछ नया बनाने का आईडिया छोड़ दे यह आपको भारी पड़ सकता है नया बनाने के लिए अभी बहुत वक्त है। कपड़ो और बालों का खास ध्यान रखें किसी भी औरत की काम में कितनी सफाई ही यह बात उसके पहने हुए कपड़े और बाल बता सकते हैं अगर आपके कपड़े आपने सलीके से नहीं पहनी है तो और अगर आपकी बाल बिखरी हुई है तो आपकी पर्सनालिटी पर गलत प्रभाव पड़ा लोग कहेंगे कि अपना भी खयाल नहीं रख सकती किसी और का क्या रखेगी
किसी भी काम की परफेक्शन पर ध्यान ना दे काम पूरा करने पर ध्यान दे ससुराल में नया घर नए लोग और नया वातावरण एकदम किसी को सूट नहीं होता और ऊपर से घर की पूरी जिम्मेदारी नई दुल्हन को दे दी जाती है ऐसे में काम पूरा करना और अच्छे से पूरा करना मुश्किल होता है सबसे पहले यह याद रखें की कोई भी काम को परफेक्ट करनी की कोशिश न करें काम को पूरा करने पर ध्यान दें आपका समय और एनर्जी दोनों बच जाएंगे इन रुल्स का ध्यान रखें तो ससुराल में अपनी जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई जा सकती है
छोटे बच्चों को खिलाना पिलाना सबसे मुश्किल काम होता है वैसे बच्चे हर चीज खाते भी नहीं। और अगर कुछ चीजें खाते भी हैं तो हमेशा एक ही चीज नहीं खाते।
बच्चों को खिलाने के लिए हमेशा कुछ नया बनाना पड़ता है और बनाना भी चाहिए इससे बच्चों का खाने में इंटरेस्ट बना रहता है लेकिन सर्दी के मौसम में बच्चों को हर चीज नहीं खिलाई जा सकती ठंड का मौसम है तो खाने पीने का ख्याल रखना पड़ता है इसलिए आज मैं आपके साथ बच्चों की सेहत और स्वाद दोनों का ध्यान रखते हुए दो रेसिपी शेयर कर रही हूं जो बच्चों की सेहत के लिए बहुत अच्छी और स्वाद में सबसे बेस्ट है। बच्चों को खाने में मीठा बहुत पसंद होता है और अगर इन सर्दी में गरमा गरम शुद्ध सात्विक हलवा खिलाया जाए तो बच्चों को डेफिनेटली पसंद आएगा वैसे तो हलवे कई प्रकार के बनते हैं और जिन बच्चों के मुंह में दांत भी नहीं होते वह भी बड़ी आसानी से खा लेते है।
पहले हम स्पेशल हलवे का आटा तैयार करेंगे इस हलवे के लिए हमें चाहिए आधा किलो गेहूं आधा किलो चावल आधा किलो सूजी आधा किलो काजू और बादाम
इन सभी सामग्रियों को अलग-अलग भुन लें, चावल गेहूं और सूजी को हल्का भूरा होने तक भून लें और काजू बदाम को भी थोड़ा सा रोस्ट कर लें अब इन सब को पीस लेंगे। चावल गेहूं और सूजी के आटे को छान ले , और काजू बदाम पीसकर साथ में मिला ले अब इस आटे को स्टार करके रख ले। आटे का हलवा बनाने का तरीका कड़ाही में थोड़ा सा घी गर्म करें और उसमें आटा डालें आटा उतना ही डालें जितना हलवा आपका बच्चा खाता हो थोड़ा गर्म पानी पास में रखें आटा गुलाबी होने तक भून लें और उसके बाद गर्म पानी उसके अंदर डाल दें। आटा जब पानी को पूरी तरह से सोख लें तो उसके अंदर चीनी डालें चीनी पकने के बाद आंच बंद कर ले । और यह गरमा गरम हलवा बच्चे को खिला दे बहुत ही ज्यादा पौष्टिक और स्वादिष्ट हलवा बनता है हलवे में पानी की जगह गर्म दूध भी डाला जा सकता है।
बच्चों को हमेशा मीठा खिलाना ठीक नहीं होता इसलिए खाने में कभी-कभी कुछ नमकीन चटपटा देना भी आवश्यक है बच्चे ज्यादा मिर्ची खाते नहीं और सर्दियों के मौसम में कुछ गरमा-गरम कम तेल वाला खिलाने को मिल जाए तो मां और बच्चों दोनों के लिए आसानी रहती है आज हम बनाना सीखेंगे बिल्कुल कम तेल और कम मिर्ची वाली एक रेसिपी मूंग दाल का घारड़ा इसके लिए हमें चाहिए एक बड़ा चम्मच मूंग दाल का आटा चुटकी भर इनो थोड़ी अदरक और काली मिर्च थोड़ी सी अजवाइन चुटकी भर लाल मिर्च स्वाद अनुसार नमक
मूंग दाल के आटे में अदरक और काली मिर्च टूट कर डाल दें लाल मिर्च पाउडर नमक और अजवाइन डाल दे पानी डालते हुए इसका घोल बनाएं घोल इतना गीला होना चाहिए चम्मच से तवे पर आसानी से फैलाया जा सके अब इस घोल थोड़ा सा इनो मिलाएं गैस पर नॉन स्टिक तवा रखें और तवे पर थोड़ा सा तेल लगाएं और तवा गरम होने के बाद उस पर आटे का घोल चम्मच की सहायता से फैलाएं एक तरफ से पकने पर घारड़े को पलट दे थोड़ा सा तेल चम्मच की सहायता से उसके ऊपर चुपड़ दें। दोनों और से हल्का लाल होने तक पका लें और पकने के बाद गरमा गरम परोस दें.
सर्दियों में अदरक और काली मिर्च बच्चों को गर्मी प्रदान करते हैं अगर यह रेसिपी करेंगे बनाना चाहे तो काली मिर्च अदरक को अवॉइड करें। इसमें लहसुन भी डाला जा सकता है। अगर पूरे परिवार के लिए बना रही हैं तो इसमें और भी मसाले ऐड किए जा सकते हैं । जैसे हरी मिर्च प्याज वगैरह…
सर्दियों में छोटे बच्चों का ख्याल रखना बहुत मुश्किल होता है । ठंड से बच्चों को बचाना और सुरक्षित रखना काफी मुश्किल काम है ऐसे में कुछ तैयारी छोटे बच्चों की मां की काफी हेल्प कर देती है ऐसी कई चीजें हैं जो सर्दियों में बच्चों के लिए हमेशा उपलब्ध रहनी चाहिए। यह चीजें एक मां को अपने घर में हमेशा उपलब्ध रखना चाहिए।
वैसे तो यह चीजें जरूरत पड़ने पर याद आ ही जाती हैं इन्हें याद दिलाने या किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं पड़ती। फिर भी अगर जरूरत पड़ने पर ये चीजें घर में मिल जाएंगे तो मां और बच्चे के लिए काफी हेल्पफुल रहेगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है एक्स्ट्रा जुराब और स्वेटर सर्दियां आते ही सबसे पहले स्वेटर और जुराब याद आ जाते हैं लेकिन एक ही जोड़ी बच्चों के लिए काफी नहीं होती इनकी एक-एक एक्स्ट्रा तो हमेशा ही होनी चाहिए जुराब की तो दो-तीन हो छोटे बच्चों के लिए तो भी काफी अच्छा रहता है क्योंकि बच्चे दिन भर भीगते और गंदे होते रहते कितनी भी कोशिश कर लो बच्चे कपड़े गीले तो कर ही लेते हैं। और जुराब तो दिनभर गीले हो जाते हैं क्योंकि छोटे बच्चे अंदर सुसु करते हैं तो जुराब गीले हो जाते हैं। उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है और सर्दियों में धूप बहुत कम निकलती है इसलिए वापस जल्दी सूखते भी नहीं ऐसे में एक्स्ट्रा जोड़ी होना बहुत जरूरी है तो जरूरत पड़ने से पहले बच्चों के लिए हमेशा स्वेटर और जरा की एक्स्ट्रा जोड़ी घर में रखी साथ में बच्चों की गरम टोपियां भी होनी चाहिए। जरूरी चीजों में दूसरे नंबर पर आती है दवाइयां और बाम।
सर्दियों से मैं बच्चों को कितना भी ख्याल रखने बचालें शुरुआती सर्दी तो लग ही जाती हैं थोड़ा बहुत जुखाम बच्चों को हो जाता है खास तौर पर जो बच्चे चल फिर लेते हैं उन्हें तो जुखाम हो ही जाता है ऐसे में घर में दवाइयां और बाम उपलब्ध रहना बहुत जरूरी है बुखार और जुखाम की एक-एक दवाई और बच्चों के लिए छाती नाक और हाथ पैरों के तलवों में मालिश करने के लिए बाम का होना जरूरी है बाम कोई भी ले सकते हैं लेकिन बच्चों के लिए वह बाम अच्छी होनी चाहिए इसके लिए डॉक्टरी सलाह करनी चाहिए कोई भी एक पेरासिटामोल दवाई घर में होनी चाहिए। या फिर जो भी आपका डॉक्टर रिकमेंड करें और दवाई आप घर में रख सकते हैं। दवाई की आवश्यकता कभी भी पड़ सकती है थोड़ा बहुत दिन में जुखाम हो तो पता नहीं चलता है लेकिन रात में बच्चों के नाक बंद हो जाते हैं और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है ऐसे में घर में बाम का होना बहुत जरूरी है बाम लगाने से बच्चों को जल्दी राहत मिलती है और वह अच्छे से सांस लेने लगते हैं। सर्दियों में बच्चों की सुरक्षा के लिए तीसरी चीजें है जायफल और काली मिर्च जायफल और काली मिर्च छोटे बच्चों वाले घर में होना बहुत जरूरी है यह चीजें बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी जरूरी है ठंड में काढ़ा बनाने के लिए यह दोनों चीजें बहुत काम आती है लेकिन बच्चों को रात में सोने से पहले दूध के साथ जायफल देना बहुत अच्छा रहता है इससे एक तो बच्चों को रात में ठंड बहुत कम लगती है शरीर में गर्मी पैदा होती है और अगर शरीर में कफऔर ठंड जमा हो गई है तो जायफल देने से बच्चों को दस्त लग जाती हैं और बच्चा सर्दी जुकाम से आजाद हो जाता है काली मिर्च काफी गर्म होती है तो इसका काढ़ा बनाकर थोड़ा सा बच्चों को देना चाहिए और अगर बच्चा स्तनपान करता है तो मां को दिन में दो बार काली में जायफल सोंठ डालकर काढ़ा बनाकर पीना चाहिए।
ऐसे बच्चे को भी काफी आराम मिलेगा ब्रेस्टफीडिंग करने वाले बच्चों के लिए यही सबसे अच्छा होता है कि मां भी गर्म चीजें खाए और बच्चे को भी खिलाएं। इसलिए घर में जायफल खासतौर पर होना चाहिए। शहद और तुलसी के पत्ते शहद और तुलसी के पत्ते भी घर में हमेशा रखनी चाहिए या सर्दी से बचाने के लिए सबसे अच्छी औषधि हैं शहद दो बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको लेना चाहिए और अगर सर्दी जुखाम हो जाए तो तुलसी के पत्ते भी काम आते हैं अगर घर में तुलसी का पौधा नहीं है तो उसके सूखे हुए पत्तों को स्टोर करके रखें इन पत्तों को पानी में उबालकर छानकर शहद के साथ मिलाकर पीना चाहिए या फिर तुलसी के पत्ते काली मिर्च जायफल के काले में भी डाले जा सकते हैं बच्चों से लेकर बड़ों तक सबके लिए यह औषधि कारगर है। मुझे उम्मीद है कि मेरी सलाह आप सबके लिए मददगार साबित होगी।
सर्दियां आ चुकी है, सर्दियों में बच्चों को कफ और जुखाम की समस्या ज्यादा रहती है । और बड़ों में भी सर्दी जुखाम हो जाता है परिवार के हर एक सदस्य के लिए यह एक चीज बहुत जरूरी है। अगर इसे हर रात को बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको खिलाया जाए तो सर्दियों में जुकाम कफ खांसी जैसी समस्याओं का समाधान हो जाता है खासतौर पर बच्चों को सर्दी जुखाम की समस्या ज्यादा रहती हैं।
ऐसे में पेरेंट्स बहुत चिंतित रहते हैं कि बच्चों को क्या दिया जाए कि वह ठीक हो। सर्दियां छोटे बच्चों के लिए बहुत भारी होती है खास तौर पर 1 से 2 साल के बच्चों के लिए। क्योंकि छोटे बच्चे जो स्तनपान करते हैं वो मां की ठंड भी चूस लेते हैं। किसी भी बच्चे की दो सर्दियां बहुत भारी होती है और इन दो सर्दियों में मां को खास ध्यान रखना चाहिए बच्चे का अगर दो सर्दियों में बच्चे का ख्याल बहुत ध्यान से रखा जाए तो बच्चे को निमोनिया से बचाया जा सकता है। दो सर्दियों से मेरा तात्पर्य है बच्चे के जन्म के बाद आने वाली दो सर्दियों के सीजन ,अक्षर बुजुर्ग दादिया कहती हैं कि अगर 2 साल बच्चों का ध्यान रख लिया जाए तो बच्चे कई प्रकार की बीमारियों से बच जाते हैं। खासतौर पर निमोनिया से छोटे बच्चों के छाती पर थोड़ी सी ठंड जल्दी जम जाती है और कफ और खांसी की शिकायत होने लगती है उसे जल्दी से ठीक ना किया जाए तो भारी नुकसान हो सकता है। मगर खांसी कफ और छोटे-मोटे जुखाम से बचने के लिए सिर्फ एक चीज बच्चों को खिला दी जाए सोते समय तो बच्चे सर्दियों में आराम से सो सकते हैं शहद और दूध बच्चों को थोड़ा सा शहर रात के समय को दूध में मिलाकर पिला देने से कफ की शिकायत पूरी तरह से खत्म हो जाती है। 6महीने के बच्चों को कैसे खिलाएं 6 महीने से कम बच्चों को सर्दी जुखाम कम ही लगता है अगर लग भी जाए तो उन्हें शहद नहीं देना चाहिए अगर बहुत ज्यादा जरुरत हो तो एक बुंद बराबर ही देना चाहिए।
और बड़ों में भी सर्दी जुखाम हो जाता है परिवार के हर एक सदस्य के लिए यह एक चीज बहुत जरूरी है। अगर इसे हर रात को बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको खिलाया जाए तो सर्दियों में जुकाम कफ खांसी जैसी समस्याओं का समाधान हो जाता है खासतौर पर बच्चों को सर्दी जुखाम की समस्या ज्यादा रहती हैं
ऐसे में पेरेंट्स बहुत चिंतित रहते हैं कि बच्चों को क्या दिया जाए कि वह ठीक हो। सर्दियां छोटे बच्चों के लिए बहुत भारी होती है खास तौर पर 1 से 2 साल के बच्चों के लिए। क्योंकि छोटे बच्चे जो स्तनपान करते हैं वो मां की ठंड और जुकाम भी ले लेते हैं। किसी भी बच्चे की दो सर्दियां बहुत भारी होती है और इन दो सर्दियों में मां को खास ध्यान रखना चाहिए बच्चे का अगर दो सर्दियों में बच्चे का ख्याल बहुत ध्यान से रखा जाए तो बच्चे को निमोनिया से बचाया जा सकता है दो सर्दियों से मेरा तात्पर्य है बच्चे के जन्म के बाद आने वाली दो सर्दियों के सीजन ,अक्षर बुजुर्ग दादिया कहती हैं कि अगर 2 साल बच्चों का ध्यान रख लिया जाए तो बच्चे कई प्रकार की बीमारियों से बच जाते हैं। खासतौर पर निमोनिया से छोटे बच्चों के छाती पर थोड़ी सी ठंड जल्दी जम जाती है और कफ और खांसी की शिकायत होने लगती है उसे जल्दी से ठीक ना किया जाए तो भारी नुकसान हो सकता है। मगर खांसी कफ और छोटे-मोटे जुखाम से बचने के लिए सिर्फ एक चीज बच्चों को खिला दी जाए सोते समय तो बच्चे सर्दियों में आराम से सो सकते हैं शहद और दूध बच्चों को थोड़ा सा शहर रात के समय को दूध में मिलाकर पिला देने से कफ की शिकायत पूरी तरह से खत्म हो जाती है 6महीने के बच्चों को कैसे खिलाएं 6 महीने से कम बच्चों को सर्दी जुखाम कम ही लगता है अगर लग भी जाए तो उन्हें शहद नहीं देना चाहिए अगर बहुत ज्यादा जरुरत हो तो एक बुंद बराबर ही देना चाहिए। 6महीने से बडे बच्चों को दूध में मिलाकर शहद पिलाएं दो खाने के चम्मच दुध में आधा चम्मच शहद मिलाकर थोड़ा थोड़ा पिलाए । ज्ञान रहे कि बच्चे ने पहले घी या कोई चिकनाई ना खा रखी हो चिकनाई पर शहद रिएक्शन करता ह। बच्चा अगर दूध नहीं पीता तो शहद में जायफल या तुलसी का रस मिलाकर चटाएं। एक से तीन साल तक के बच्चों को कैसे खिलाएं एक साल के बच्चों को एक गिलास दूध में एक चम्मच शहद रात में सोने से पहले पिलाना चाहिए। रात में बच्चा आराम से सो पाएगा और उसकी के शरीर से कफ और सर्दी दूर हो जाएंगे। 1 साल को दूध और शहद के साथ जायफल पिलाना चाहिए। याद रखिए कि दूध और शहद सर्दियों में हमेशा पिए जा सकते हैं लेकिन जायफल केवल सर्दी जुकाम या कफ होने पर ही पिलाएं। जायफल बहुत ज्यादा गर्म होता है तो उसे बच्चों में गर्मी से कुछ समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं थोड़े से जैसे जायफल से कोई प्रॉब्लम नहीं है केसे 3 साल तक के बच्चों को सर्दी में शहद और जायफल देने से बच्चों को दस्त लग जाती है उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि छोटे बच्चों का जुकाम या कफ दस्त के साथ निकल जाता है बड़ी बच्चों को कैसे खिलाए 3 साल से बड़े बच्चों को बिना दूध के भी शहद खिलाया जा सकता है इसकी मात्रा ज्यादा होने पर भी कोई समस्या नहीं है। महिलाएं वह घर के बाकी बड़े सदस्य भी शहद और दूध मिलाकर पीने की सर्दियों में आदत बनाले यह सेहत की लिए बहुत लाभदायक है । शहद से इम्युनिटी पॉवर मजबूत होता है।
शहद में जरुरी एंटीओक्सिडेंट की मात्रा काफी ज्यादा होती है इसमें मोजुद एंटीओक्सिडेंट दिल के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं और दिल से जुड़ी कई तरह की बीमारियों से बचाव करते हैं इसके अलावा शाहद का मुख्य काम है शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है इम्युनिटी पॉवर मजबूत होने से कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है।